Thursday, June 14, 2012

Bhabhi ki chudai-Rajasthani Sex story


भाभी बीच में बात काट कर बोली- यार नवीन भैया, क्यों न हम चारों साथ में सेक्स करें? ये तुम्हारी बीवी को और तुम मुझे ! कितना मजा आएगा।
मैं घबरा गया, मैंने कहा- यार रचित, सुजाता नहीं मानेगी। मुझे नहीं लगता कि वो मानेगी।
"अरे, तुम चिंता मत करो !" भाभी बोली,"मैं उसको मना लूंगी ! मैं जानती हूँ कि वो कितना पसंद करती है इनके लण्ड को !"
मैंने कहा- मतलब?
तो भाभी बोली- जैसे तुम दोनों दोस्त आपस में बात करते हो, कोई बात नहीं छुपाते हो, ऐसे ही हम दोनों भी तो सहेलियाँ हैं न, तो हम भी तुम्हारे लण्ड के बारे में बात करते हैं और मैं तुम्हारे लण्ड की बात सुनती थी, दो-दो बार, एक तो सुजाता से और एक इनके मुँह से ! तो मेरा क्या हाल होता था आप जान ही सकते हैं। मुझे आपका लण्ड इतना प्यारा लगा कि कभी मुँह से न निकालूँ और जब भी तुम्हारा वीर्य निकले तो उसको अपने मुँह में ले लूँ बस ! और मैंने सुजाता की भी ऐसे ही तड़प देखी है। अगर तुमको यकीन न हो तो आज बात करके देखना, वो ज्यादा न-नुकर नहीं करेगी और इनके लण्ड के बारे में बात करने लगेगी।
"वैसे भाभी, मैंने भी बात की हुई है रचित के लण्ड के बारे में ! बात तो वो बहुत ही ध्यान से सुनती है और आगे कुछ पूछती भी है पर मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि वो इससे चुदना चाहती है।" मैंने बताया।
"यार नवीन भैया, तुम भी ना ! कोई भी औरत ऐसा अपने मुँह से अपने पति से नहीं कह सकती है कि मैं उस आदमी से चुदना चाहती हूँ, जैसे मैं तुमसे चुदना चाहती थी पर मैंने कभी इनको अहसास नहीं होने दिया कि मैं क्या चाहती हूँ, वैसे इनका भी ऐसा मन था कि मैं किसी दूसरे मर्द के साथ भी सेक्स का मजा लूँ तो ऐसा अपने आप ही हो गया नहीं तो ऐसा हो पाना मुश्किल था। तुम भी जानते हो ना !
ऐसे ही बात चलती रही और मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करता रहा। भाभी पूरे जोश में आ चुकी थी, वो अब तक दो बार झड़ चुकी थी।
मैंने कहा- भाभी, मेरा तो बस अब होने वाला है।
तो वो बोली- ऐसे ही मत कर देना ! मुझे वीर्य पीना है।
और मैंने अपना लण्ड निकाल कर भाभी के मुँह में कर दिया। थोड़ी देर तक मुँह में हिलाता रहा तब जाकर मेरा हुआ।
भाभी पूरा का पूरा लण्ड मुँह में लेकर झूम रही थी। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था तो मैं भी धक्के लगा रहा था। भाभी ने मेरी एक एक बूंद चाट ली।
अब बारी रचित की थी, रचित बोला- जान, मुझे भी थोड़ा मजा दोगी क्या?
भाभी बोली- अब तो सारा मजा सुजाता ही देगी तुमको !
मैंने भी अपना सर हाँ में हिला दिया- हाँ रचित, अब सुजाता के साथ मजा करना ! मैं अब भाभी को तुमको नहीं देने वाला !
मैंने ऐसे ही मजाक में कहा।
"देख ले, फिर मैं भी सुजाता भाभी को तुझे हाथ नहीं लगाने दूँगा।" रचित ने कहा।
मैंने कहा- अच्छा बाबा, आ जा !
और वो भाभी को पीछे के तरफ से डाल कर थोड़ा हिला और बाहर निकाल कर भाभी के मुँह में कर दिया। उसका भी भाभी ने अंदर गटक लिया- आज तो मजा आ गया तुम दोनों का वीर्य पी कर ! मेरा तो पेट भर गया।
उसके बाद मैं घर के लिए रवाना हुआ। मेरे दिमाग में अजीब से ख्याल आ रहे थे, अगर सुजाता पूछेगी तो क्या कहना है, वगैरह ! और उन दोनों से जो वादा किया है सुजाता को रचित से चुदाने का ! यह बात कैसे करूँगा? ऐसे ही सोचते हुए मैं घर आ गया
घण्टी बजाई तो वो उठ कर आ गई, मैंने कहा- तुम सोई नहीं क्या अभी तक?
वो बोली- नहीं यार, नींद नहीं आ रही थी, तुम्हारी याद आ रही थी। आज बहुत मन है मेरा !
"मेरे तो हाथ पैर ढीले हो गए," मैंने कहा," यार मेरा मन नहीं है।"
वो नहीं मानी, उसने मेरे कपड़े खोल दिए और खुद भी नंगी हो गई और मेरा लण्ड निकाल कर मुँह में ले लिया तो वो बोली- यह क्या? आज तो तुम्हारे लण्ड से वीर्य की खुशबू आ रही है।
मैंने सब सच बताने की ठानी, इसी बहाने आगे की बात भी हो जाएगी, मैं बोला- वो छोड़ो डार्लिंग ! आओ मेरे पास !
और मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी और आराम से बात करने लगा।
मैंने कहा- यार मैं एक बात कहूँ, तुम बुरा तो नहीं मानोगी?
वो बोली- नहीं बोलो !
"कसम खाओ !"
वो बोली- कसम से !
मैंने कहा- क्या तुम किसी और लण्ड का मजा लेना चाहती हो? सच सच बताना?
वो थोड़ा शरमा गई और कुछ नहीं बोली।
मैंने कहा- तुमने वादा किया है !
वो बोली- नहीं !
"सच बोलो ! तुमको मेरी कसम !"
वो बोली- हाँ पर !मैंने कहा- रचित के लण्ड का तुमको पता ही है ना !
वो झुंझला कर बोली- मेरे को कैसे पता?
मैंने कहा- बबिता भाभी ने मुझे सब बता दिया है कि तुम दोनों हमारे लण्ड की बात करती हो, जैसे हम दोनों रचित और मैं करता हूँ ऐसे !
सुजाता बोली- तुम भी ऐसी बातें करते हो?
मैंने कहा- हाँ !
और फिर मैं शुरू हो गया, एक हाथ से उसके चूचे दबा रहा था और एक हाथ उसकी चूत में था। वो मस्त हो रही थी, रचित का लम्बा लण्ड लेकर तुम मस्त होना चाहती हो न? सच बताओ?
उसने हाँ कहा।
उसकी हाँ से मेरा मुरझाये हुए लण्ड में थोड़ा जान आ गई, उसके हाथ भी उसको सहला रहे थे।
और फिर हम रचित के लण्ड की बात करने लगे। मेरा खड़ा हो गया, मैंने बात बात में कहा, आज हमने रचित के यहाँ जो किया वो उसको सुना दिया।
वो चौंक गई- अरे !
और मैंने कहा- कल तुमको भी रचित से चुदवा दूँगा ! घबराओ मत !
और हम लोग आराम से सेक्स करने लगे। तीसरा दौर था तो मेरा निकल ही नहीं रहा था, सुजाता मस्त हो रही थी। मेरा लण्ड रचित के लण्ड के ख्याल में खोई हुई मस्त हो रही थी और मैं मस्त धक्के दे रहा था।
वो दो बार झड़ गई, बोली- ओह नवीन, आज तो तुमने बहुत मजा दिया, क्या किया। आज बबिता भाभी ने जो तुम को इतना जोश आया?
"कल देखना रचित कैसे तुमको चोदता है ! अब मुझे और सुजाता को भी ऐसे बात करने में मजा आने लगा और फिर मैंने कहा- यार, मैं झड़ने वाला हूँ !
और मैंने अपना सारा वीर्य अंदर चूत में ही गिरा दिया।
मैंने रात को ही रचित को फोन किया- लाइन साफ़ है, कल का कार्यक्रम तय है भाई ! और फोन सुजाता के कान में लगा दिया।
वो बोला- ठीक है भाई, कल देख तू तेरे बीवी को कैसे चोदता हूँ। वो बोलेगी कि मजा आ गया, ऐसा कभी नवीन ने कभी नहीं किया ऐसा जोरदार सेक्स ! कल भाभी की चूत को सही लण्ड मिलेगा।
"ठीक है, बाय यार ! कल मिलते हैं, कल चोद लेना जितना चोदना हो अपनी भाभी को !
आने वाले कल का जोश सब के सर चढ़ कर बोल रहा था।

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